पाण्डु पोखर

राजगीर में 22 एकड़ जमीन पांडु पोखर के एक क्षेत्र में फैल महान भारतीय इतिहास का एक अद्भुत और प्राचीन शानदार उदाहरण है। यह कैसे राजा पांडु, पांडवों के पिता राजगृह पर हमला किया और इसे घोड़े के अस्तबल में परिवर्तित कर दिया । यह कहा जाता है कि जब वह इस जगह को छोड़ दिया, एक छोटी घाटीनुमा जैसा बनाया गया था और बाद में बारिश के पानी के जमा होने से ऐतिहासिक पांडु पोखर अस्तित्व में आया है। यह एक विरासत है जो प्राकृतिक संपदा के गौरवशाली इतिहास के बारे में बोलता है। राजगीर के ऐतिहासिक धरोहर पांडू पोखर का सौदर्यीकरण ने इसे अंतरराष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा कर दिया है। ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए पर्यटन विभाग ने पांडू पोखर का व्यापक सौंदर्यीकरण किया विदेशी पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए पांडू पोखर परिसर को विकसित किया गया है। पांडव के पिता महाराज पांडू यहां स्नान करने आते थे। इस कारण इसका नामाकरण पांडू पोखर किया गया है। सरोवर के मध्य उनकी लगभग 40 फीट उंची प्रतिमा को स्थापित की गई है। पांडू पोखर सरोवर में नौकायान का लुत्फ उठाते हुए पर्यटक इनकी प्रतिमा को करीब से अवलोकन कर सकेंगे। जापानी हाउस व तालाब, सतरंगी जल का फब्वारा, पर्यटकों के बैठने के लिए पवेलियन ने पोखर के सौंदर्य में चार चांद लगा दिया है। वीआईपी सुविधा से लैस कमरे तथा भुल-भुलैया भी इसके आकर्षण का केन्द्र होगा। पोखर पार्क में संगमरमर निर्मित बुद्ध की प्रतिमा लगभग 300 केजी की है। वहीं रोज गार्डेन व विभिन्न प्रकार के फूलों से सजी बगीचों में शुद्ध व ताजा पर्यावरण का भी पर्यटक आनंद उठा सकेंगे। नालंदा खंडहर कन्सट्रक्शन के तर्ज पर पूरे पांडू पोखर सरोवर के परिसर की दीवारें, प्रवेश द्वारा व निकास द्वार सहित सभी चीजें ओपेन ब्रीक्स लुक के साथ आर्किटेक्ट किया गया है

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  • पाण्डु पोखर.
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कैसे पहुंचें:

वायुयान द्वारा

निकटतम हवाई अड्डा पटना (110 किमी) में JPN अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। पटना अच्छी तरह से कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, रांची, लखनऊ सहित सभी प्रमुख भारतीय शहरों से जुड़ा हुआ है। राजगीर गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (78 किमी) जो बैंकॉक, कोलंबो, थिम्पू आदि जैसे अंतरराष्ट्रीय स्थलों से जुड़ा है, से जुड़ा है |

ट्रेन द्वारा

राजगीर में ही एक रेलवे स्टेशन (RGD) है जो दैनिक ट्रेनों के माध्यम से पटना, कोलकाता और नई दिल्ली से जुड़ा है। श्रमजीवी एक्सप्रेस नई दिल्ली को जोड़ता है, जबकि बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस वाराणसी को जोड़ता है। राजगीर एक्सप्रेस दानापुर को जोड़ता है, जबकि राजगीर-हावड़ा यात्री ट्रेन कोलकाता को जोड़ता है। राजगीर अच्छी तरह से गया रेलवे स्टेशन (गया), जो एक भारत के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से है, से जुड़ा है।

सड़क के द्वारा

राजगीर सड़क मार्ग से अच्छी तरह से पटना (110 किमी), नालंदा (15 किमी), गया (78 किमी), पावापुरी (38 किमी), बिहार शरीफ (25 किमी) से जुड़ा हुआ है। नियमित बस सेवा इन सभी स्थानों से उपलब्ध हैं। बीएसटीडीसी राजगीर के माध्यम से पटना और बोधगया के बीच दैनिक वातानुकूलित बसें चलाता है। टैक्सियों किराया पर सभी प्रमुख स्थानों से आसानी से उपलब्ध हैं। किराया मोलभाव से होता है।